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Monday, January 6, 2020

CAA: मुस्लिम लड़कियों का आंचल बना परचम, क्या हैं इसके मायने?

"तेरे माथे पर ये आंचल ख़ूब है लेकिन तू इस आंचल से एक परचम बना लेती तो अच्छा था."-मजाज़ मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कई साल पहले लखनऊ में जब शायर मजाज़ ने ये नज़्म नरगिस दत्त से मुलाक़ात के बाद लिखी थी, तब उन्होंने शायद नहीं सोचा होगा कि ये आने वाले दिनों की मुनादी साबित होगी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

मजाज़ जिस अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े लिखे थे, वह यूनिवर्सिटी विरोध का प्रतीक बना हुआ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दरअसल यहां विवादास्पद नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) का विरोध हो रहा है और इसका नेतृत्व स्कार्फ़ बांधी महिलाएँ कर रही हैं. इस क़ानून में तीन पड़ोसी देशों से भारत आए लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है, लेकिन उस सूची से मुसलमानों को बाहर रखा गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

मजाज़ की लिखी पंक्तियों को विभिन्न प्रदर्शनों में ये महिलाएं गा रही हैं. ख़ास बात यह है कि चेतावनी, फ़ायरिंग, आंसू गैस और मुक़दमे के बाद भी इन महिलाओं का विरोध प्रदर्शन जारी है. अलगीढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया, महिलाओं के विरोध प्रदर्शन का केंद्र साबित हुए हैं जो पुलिस की क्रूरता के सामने तनकर खड़ी हैं, चुनौती देती हुई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारतीय इतिहास में पहली बार, इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं प्रदर्शन के लिए सड़कों पर निकली हैं, जो ख़ुद इन प्रदर्शनों का नेतृत्व भी कर रही हैं और विरोध की आवाज़ में अपनी पहचान बना रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दिल्ली के निम्न आय वर्ग और मुस्लिम बहुलता वाले शाहीन बाग़ की महिलाएं प्रतिरोध का नया चेहरा बनकर उभरी हैं. दिल्ली के कड़ाके की ठंड में भी ये महिलाएं दिन-रात शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर बैठी हैं. इन महिलाओं का कहना है कि नया क़ानून भारतीय संविधान के ख़िलाफ़ है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

ठंड और पुलिस की बर्बरता (जो दूसरी जगहों पर दिखाई भी दिए हैं) के ख़तरे के बावजूद ये महिलाएं विरोध प्रदर्शन की मशाल जलाए दिख रही हैं. अपने हिजाब और बुर्के में वे पहचान की राजनीति के ख़िलाफ़ भी संघर्ष कर रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

यह सब ठीक उसी दिन शुरू हुआ, जिस रात जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हमला हुआ. शाहीन बाग़ की 10 महिलाएं अपने अपने घरों से निकलकर विरोध प्रदर्शन के लिए बैठ गईं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उसी रात, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अब्दुल्लाह हॉस्टल में छात्राओं ने तीन ताले तोड़ दिए, जिनमें उन्हें बंद रखा गया था. जब उन्हें महिला छात्रावास से बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई तो वे वहीं धरने पर बैठ गईं, उनका कहना था कि पुलिस छात्रों की बेरहमी से पिटाई कर रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

अगले ही दिन, 16 दिसंबर की सुबह तक अलीगढ़ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हॉस्टल ख़ाली करा लिया. छात्रावास के छात्रों को उनके अपने घरों तक भेजने के लिए विशेष बस और ट्रेन की व्यवस्था की गई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उसी सुबह 20 और 21 साल की आएशा और तूबा अलीगढ़ के दूधपुर स्थित अपने घरों से निकलकर यूनिवर्सिटी पहुंचीं. यहां ये दोनों यूनानी मेडिसिन की पढ़ाई करती हैं. दोनों मौलाना आजाद लाइब्रेरी की सीढ़ियों पर बैठ गई.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उनके पास पिछले विरोध प्रदर्शन के प्लेकार्ड्स मौजूद थे. तूबा के हाथ में साइलेंट प्रोटेस्ट यानी मौन प्रदर्शन और आएशा के हाथ में तानाशाही नहीं चलेगी वाले प्लेकार्ड थे. दोनों घंटों तक विरोध प्रदर्शन करती रहीं थी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उनके मुताबिक़ प्रोवोस्ट (वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी) ने आकर उन्हें चेतावनी दी लेकिन दोनों ने उन्हें बताया कि वे कुछ भी गैर क़ानूनी नहीं कर रही हैं. अलीगढ़ में धारा 144 लागू थी, जिसके मुताबिक़ किसी भी जगह पर चार या उससे ज़्यादा लोग एकत्रित नहीं हो सकते थे. लेकिन यहां तो दो ही लड़कियां थीं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

तूबा बताती हैं, "हम ये नहीं चाहते थे कि कोई सोचे कि हम संघर्ष से पीछे हट गए हैं और हम शांत हैं. जब तक एक भी छात्र विरोध प्रदर्शन के लिए खड़ा है, विरोध ज़िंदा रहेगा."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इनमें से ज़्यादातर महिलाएं युवा हैं और बेताब हैं. वे स्पष्ट सोच से भरी हैं और शांत भी हैं. वे कहती हैं कि केवल महिलाएं ही विरोध प्रदर्शन कर सकती हैं क्योंकि सरकार को मालूम नहीं है कि मुस्लिम महिलाओं से कैसे डील किया जाए. वही मुस्लिम महिलाएं जिनकी पहचान बेजुबान महिला की रही है और जिन्हें लंबे समय से समाज में पीड़िता माना जाता रहा है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कई लोगों का कहना है कि 2012 में निर्भया मामले के दौरान पहली बार महिलाओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता शबनम हाशमी के मुताबिक़ मुस्लिम महिलाओं में विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 2002 के गोधरा दंगे के दौरान हुई थी, जब कई महिलाएं विरोध प्रदर्शन के लिए घरों से बाहर निकली थीं और उनमें से कुछ अब भी संघर्ष कर रही हैं.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बुर्का और हिजाब में, वे अपनी पहचान को नए सिरे से गढ़ रही हैं, उन्हें अब मुस्लिम कहलाने में ना तो डर है और ना ही शर्म. इनमें से अधिकांश ये भी कहती हैं कि हिजाब उन्हें अपनी मर्जी से पहना है और इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

तस्वीरों में भी दिखता है कि हिजाब पहनी महिलाएं पुलिस को चुनौती दे रही हैं. वो भी तब जब दिल्ली में कड़ाके की सर्दी है और पुलिसिया अत्याचार की ख़बरें भी हैं लेकिन ये महिलाएं दिन-रात में प्लेकार्ड लिए लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Friday, December 27, 2019

बीबीसी के वीडियो पर बीजेपी और कांग्रेस का एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

गुरुवार की सुबह कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट किया. उसमें उन्होंने असम के डिटेंशन सेंटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठा कहा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने लिखा, "RSS का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता हैं."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इसके साथ ही उन्होंने असम से बीबीसी हिंदी के लिए काम करने वाले स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा की उस रिपोर्ट को ट्वीट किया जिसमें असम के एक निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की रिपोर्ट थी.
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राहुल के इस ट्वीट के कुछ ही देर बाद बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट के ज़रिए अपनी प्रतिक्रिया दी.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

मालवीय ने राहुल को झूठा बताते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति शेयर किया जिसे 2011 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार से जारी बताया गया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

इस विज्ञप्ति के मुताबिक़ 2011 में कांग्रेस सरकार ने असम के ग्वालपाड़ा, कोकराझार और सिल्चर में 362 अवैध प्रवासियों को डिटेंशन सेंटर भेजने का दावा किया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

हालांकि इसके बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के ट्वीट को गंभीरता से लेते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित किया.
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बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, "आज राहुल गांधी जी ने कुछ ट्वीट किया है और जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है वो बहुत आपत्तिजनक है. उन्होंने कहा है कि RSS का प्रधानमंत्री भारत माता से झूठ बोलता है. मुझे लगता है राहुल गांधी से भद्रता और अच्छी भाषा की अपेक्षा करना ही ग़लत है.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, "राफेल पर झूठ फैलाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी जी ने माफ़ी मांगी थी. आज वो प्रधानमंत्री जी की बात को लेकर भ्रम फैला रहे हैं.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

संबित पात्रा ने कहा, "प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि ऐसा कोई डिटेंशन कैंप नहीं है, जिसमें एनआरसी के बाद हिंदुस्तान के मुसलमानों को रखा जाएगा. ये झूठ फैलाया जा रहा है. इसमें प्रधानमंत्री जी ने क्या झूठ बोला है?''
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उन्होंने कहा, ''13 दिसंबर 2011 को केंद्र सरकार के एक प्रेस रिलीज में कहा गया था कि 3 डिटेंशन कैंप असम में खोले गये हैं. साल 2011 में केंद्र में कांग्रेस सरकार थी.''मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दरअसल यह पूरी चर्चा शनिवार (21 दिसंबर) को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे के बाद शुरू हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है. उन्होंने इसे अफ़वाह बताया था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "सिर्फ़ कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गई डिटेन्शन सेन्टर वाली अफ़वाहें सरासर झूठ है, बद-इरादे वाली है, देश को तबाह करने के नापाक इरादों से भरी पड़ी हैं - ये झूठ है, झूठ है, झूठ है."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा, "जो हिंदुस्तान की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की संतान हैं. भाइयों और बहनों, उनसे नागरिकता क़ानून और एनआरसी दोनों का कोई लेना देना नहीं है. देश के मुसलमानों को न डिटेंशन सेन्टर में भेजा जा रहा है, न हिंदुस्तान में कोई डिटेंशन सेन्टर है. भाइयों और बहनों, ये सफ़ेद झूठ है, ये बद-इरादे वाला खेल है, ये नापाक खेल है. मैं तो हैरान हूं कि ये झूठ बोलने के लिए किस हद तक जा सकते हैं."
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प्रधानमंत्री मोदी के दावे के बाद बीबीसी हिंदी सेवा के लिए काम करने वाले स्थानीय पत्रकार दिलीप शर्मा वहां के एक निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की पड़ताल करने पहुंचे. देखें ये पूरा वीडियो.
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ऐसा नहीं है कि बीबीसी ने असम के डिटेंशन सेंटर पर पहली बार कोई कहानी की हो. इससे पहले भी बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव की साल 2018 की एक रिपोर्ट डिटेंशन सेंटर से बाहर आए लोगों ने दास्तां बयां करती है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट के मुताबिक़, "जिन लोगों को यहाँ रहना पड़ रहा है या जो लोग यहाँ रह चुके हैं, उनके लिए ये डिटेंशन कैंप एक भयानक सपना है जिसे भुलाने में वे दिन-रात लगे हैं."
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इसी तरह बीबीसी संवाददाता प्रियंका दुबे ने भी असम के डिटेंशन सेंटरों से जुड़ी रिपोर्टिंग की है.
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बीबीसी संवाददाता प्रियंका दुबे की रिपोर्ट के मुताबिक़, "नागरिकता तय करने की दुरूह क़ानूनी प्रक्रिया में खोए असम के बच्चों का भविष्य फ़िलहाल अंधेरे में डूबा हुआ सा लगता है. कभी डिटेंशन में बंद माँ बाप के जेल के सख़्त माहौल में रहने को मजबूर तो कभी उनके साये के बिना बाहर की कठोर दुनिया को अकेले सहते इन बच्चों की सुध लेने वाला, फ़िलहाल कोई नहीं."मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

भारत की संसद में इस साल हुए सवालों और जवाबों को देखा जाए तो पता चलता है कि डिटेंशन सेंटर के बारे में संसद में चर्चा हुई है और केंद्र सरकार ने माना है कि उन्होंने राज्य सरकारों को इस बारे में लिखा है.
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राज्यसभा में 10 जुलाई 2019 को पूछे गए एक सवाल के उत्तर में गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि देश में आए जिन अवैध लोगों की नागरिकता की पुष्टि जब तक नहीं हो जाती और उन्हें देश से बाहर नहीं निकला जाता, तब तक राज्यों को उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखना होगा. इस तरह के डिटेंशन सेंटर की सही संख्या के बारे में अब तक कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

उन्होंने कहा था कि 9 जनवरी 2019 को केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने प्रदेश में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए 'मॉडल डिटेन्शन सेन्टर या होल्डिंग सेन्टर मैनुअल' दिया है.

द हिंदू में इसी साल अगस्त में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2 जुलाई 2019 में लोकसभा में बीजेपी नेता और केंद्रीय राज्य गृह मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि राज्य सरकारों को साल 2009, 2012, 2014 और 2018 में अपने प्रदेशों में डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए कहा था.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

2 जुलाई 2019 को लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने कहा था कि गृह मंत्रालय ने एक 'मॉडल डिटेंशन सेंटर या होल्डिंग सेन्टर मैनुअल' बनाया है जिसे 9 जनवरी 2019 को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया गया है. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह